सांस के माटी हो
जाने के बाद
मैं आम आदमी
खुदा जाने
ढाई इंची विज्ञापनी
खबर भी
बन पाऊंगा के नहीं.
फिर भी उम्मीद है
घर की बगिया
में
कलियों-फूलों के
चहरे
शबनमी ज़रूर होंगे.
मगर ये तय है वक्त के
खुदाओं
कल तुम्हारी मूरते
चोराहों पर खड़ी
होंगी और
अनगिनत कबूतर
तुम्हारे चहरों पर
या ठीक नाक के
सिरों पर
सडती हुई बीटे करते
वक्त
कह रहे होंगे
गुटरगूं ..गुटरगूं
गुटरगूं यानि शायद
तुम्हारी बेईमानी–चालाकी–मक्कारी
का बयान.
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