आसमान तुझे यहीं मिल जाएगा
कभी ज़मीन पे सर झुका के देख
खोयेगा खुदको उसको पा जायगा
तू और मैं का फ़र्क मिटा के देख
भूलना किसको किसे याद करना
हो सके तो खुद को भुला के देख
कोन से फासले किससे रहे जुदाई
कभी खुद के भीतर समा के देख
मैं रूह के रास्ते से लोटा लाऊंगा
तू मेरी निगाह से दूर जा के देख
वो तलाश ही क्या जो हो हासिल
मंजिल को यार दूरी घटा के देख
आग के बिना आलम रौशनी कहाँ
नूर चाहिए तो दिल जला के देख
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें