आजकल मोहब्बत के रास्ते
फूलों की वादी में न रुककर
“डिस्को” के दरवाजों से गुज़रते
हैं.
मेपल के दरख्त कट गए कबके
कंकरीट का जंगल बस गया है
उन पार्कों की लाशों पर
जहां कभी होंठों के बीच
गुलाब रखे जाते थे.
सड़कों पर सरेआम चुम्बन
‘मोडर्न’ प्यार की शान है.
दिल अहसास के घर कहाँ हैं अब
वे भी कम्पुटर बन गए हैं
तस्वीर भा जाए तो “सेव”
“डिलीट” करना मर्ज़ी की बात है.
कंडोमी संबंधों के दोर में
मजनू की “चूइंगम” बनी लेला
लेला का “माऊथफ्रेशनर” है मजनू
यह नई प्रेम कहानी है.
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