बहुत से आँसू
किसी अपने काँधे की तलाश में
जगहँसाई का सामान बनकर
बह जाते है फ़िज़ूल
संतावना देने वाले मुखोटे
अब कोई नहीं ओढता
चेहरे पर मुस्कान सजाये रखना
बहरूपी जीवन की मजबूरी है.
कुछ एक आँसू
रात के अँधेरे में मोती
दर्द के तन्हा साथी
आँखों के खजानों से
बिखर कर
उदासी के गहरे
धुंधलके को
उजला कब कर पाते
हैं.
कितने ही नम तकिये
हज़ार बहानों से
नींद की भीख
माँगते हैं रोज
जो करवटों में मिल
भी जाए अगर
दिल के ज़ख्मों का
चेन कहाँ?
अनमोल है वो आँसू
जो
आँखों के दरवाज़ों
पर
कभी दस्तक ही नहीं
देते
आरज़ुओं के उजड़े घर
में
सारी नाकामियों को
वक्त से मिली
दुत्कारों को
अहसास के बख्शे
ज़ख्मों को
सहलाया करते है.
अनाथ बच्चों के
सरों पर जेसे
हाथ रखती हो माँ
की याद
सदा के लिए खोने
का घाव
कसकता भी है तो
दवा बनकर
दर्द से भरी लावारिस
आँखे
कभी नहीं रोती.
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