काश!जीवन बच्चा बना रहता
दिलों की स्लेटों पर
संवेदनाओं के चाक से
खिचीं
आडी तिरछी मासूम रेखाएं
अ, ए और अलीफ़ की
दुनियादारी से आज़ाद
परियों, चिड़ियों, गुड़ियों, तारों के
सपने बुना करतीं
बुनती रहतीं.
काली, सफेद, भूरी धरती पर
देशों, सरहदों, रंग-नस्ल
की जंजीरों,
धर्म, जात-पात, उंच–नीच
की झंझटो,
गरीबी, अमीरी, भूख, प्यास
की आफतों,
युद्ध, खूँरेजी, आतंकी मोर्चो से मुक्त
नीले आकाश की पवित्रता निहारता
काश!जीवन बच्चा बना रहता.
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