बुधवार, 27 जून 2012

प्रक्रति की मोत से पहले


मेरे भीतर एक बच्चा है जो
परियों के सतरंगी परों से
बहलना चाहता है.
लेकिन परियां तो पंख उतार कर
अधनंगे क्लबों में नाचने गयी.
मेरे भीतर का बच्चा
ओस भरी हरियाली लिए
फूलों की खुश्बू में
खोया रहना चाहता है.
लेकिन दरख्त तो कुल्हाड़ों की धार पर
सब कट गए मर गए.
मेरे भीतर का बच्चा
आकाश गंगा से चमकीले तारे
आँखों में उतरते देखना चाहता है.
लेकिन टिमटिम-जगमग प्रदूषण का ज़हर खाकर
कारों कारखानों की चिताओं में धुंआ हुए.
मेरे भीतर के बच्चे का जी घुट रहा है
विकास के नाम पर 
कम्पुटरो के तारों में जकडा हुआ
काली नागन सी डामरी सडक पर पड़ा
बेचारा जाने कब दम तोड़ दे
मेरे भीतर जो है मासूम बच्चा .

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