मेरी खामोशी ने जो
कुछ कहा
तुम्हारी धड़कने
जानती हैं
दिल जो दर्पण है
सूखी आँखों की भाषा
का,
अश्रु भीगे उजाले और
तारों से उतरते
शबनमी खतों को पढ़
लेता है.
जवाब बनते सवालों को
चुप ही रहने दो
अपनी बेबसी का इज़हार
सबके सामने रोकर
किया जाए
ज़रूरी तो नहीं .
ज़रूरी तो नहीं .
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