मेने तुझको सचमुच कभी
मसीहा ही समझा था.
मुझको मालूम क्या था
पहले मसीहा को चेले ने छला था
अब मसीहा चेलो को छलेगा.
ईमान की खुशबु से
चमन महकाने के नशे में
मेने तेरा खेल समझा कब.
न सलीब न कीलें न बहता लहू
उस पर तुर्रा राज करने की आरजू
गलती मेरी ही थी
झोले छाप को डाक्टर मान बेठा
इलाज में आँखे फूटनी ही थी
घाव बढ़ना ही था.
......२
मेने तुझको सचमुच कभी
बाबा ही समझा था
तेरे नाम पर घंटो सांसे अपनी
उपर नीचे की थी.
पर गुरु तू गुरुघंटाल निकला
काला धन मिले न मिले
सिंगासन चालीसा गाकर
हाथवालों की सत्ता तिजोरी
हड़पना ज़रूर है.
सर्प दूर करने के लिए चाहे
कीचड के कमल माथे बिठाने पड़ें.
ज़ालिम तुझसे मोहभंग होकर
उफ़ !मेरा बी.पी. बढ़ गया है.
३
भ्रस्ताचार पर अंकुश की
न काले धन की परवाह
रंगी खाल ओढ़े शेरो का
जलवा फीका पड़ने लगा है.
भोली आँखों को असल बहरूप
नज़र आने लगा है यानी.
फिर हमारे कातिल आये हैं
मसीहा बनकर.
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