तेरी निगाह से उतर जाऊँगा
क्या जिऊँगा मैं मर जाऊँगा
तेरी निगाह में उतर जाऊँगा
दरपन देख के संवर जाऊँगा
साँसों के साथ गुजर जाऊँगा
लोट कर अपने घर जाऊँगा
डूबता सूरज डराता है किसे
अंधेरे के पार गुजर जाऊँगा
चोराहे पर बेठा सोच रहा हूँ
उठ गया तो किधर जाऊँगा
अभी तो हूँ जिंदगी के साथ
क्या ही पता किधर जाऊँगा
अपने आपे का पता है मुझे
माटी हूँ कही बिखर जाऊँगा
ए आलम तू संभाल तो सही
लाख बिगडा हूँ सुधर जाऊँगा
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