जीवन की दोड में
हर कोई आसमान छूना चाहता है
अपनी सीढियां साथ लिए
भागे चले जा रहे हैं लोग
पायदाने चढते हुए
गिरते गिराते
टकराते हुए .
धरती पर पड़े रह गए
खुशनसीब है
हंस बोल लेते हैं
दुख सुख बाँट लेते हैं परन्तु ,
सीढ़ी की आखिरी पायदान पर खडा
अंतिम व्यक्ति नितांत अकेला होता है
इश्वर की तरह .
प्रहरियों से घिरे विशिस्ट-जनो को देख कर
यही सबक मिलता है
सफलता की कीमत हमेशा
निज स्वतन्त्रता खोकर चुकानी पड़ती है.
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