सोमवार, 20 अगस्त 2012

सफलता की कीमत


जीवन की दोड में 

हर कोई आसमान छूना चाहता है 

अपनी सीढियां साथ लिए

भागे चले जा रहे हैं लोग 

पायदाने चढते हुए 

गिरते गिराते टकराते हुए .

धरती पर पड़े रह गए 

खुशनसीब है 

हंस बोल लेते हैं 

दुख सुख बाँट लेते हैं परन्तु ,

सीढ़ी की आखिरी पायदान पर खडा

अंतिम व्यक्ति नितांत अकेला होता है

इश्वर की तरह .

प्रहरियों से घिरे विशिस्ट-जनो को देख कर

यही सबक मिलता है  

सफलता की कीमत हमेशा

निज स्वतन्त्रता खोकर चुकानी पड़ती है.

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