सही ही होंगे तुम्हारे शिकवों के जो सिलसिले
हैं
एक दिल फिर भी कब बोला उसके भी गिले
हैं
हमसे कोई दिलवाला नहीं मिला ये और है
बात
हम जिससे भी मिले है दिल खोल कर मिले
हैं
लुटने जेसी कोई चीज़ नहीं यहाँ फिर डर
केसा
बेफ़िक्र चले आओ इस दिल के किवाड खुले
हैं
दुनिया कहती है बिकना है तो बाजार में
आना
किसने जाकर देखे फूल जो वीरानो में खिले हैं
दीवानगी ओ दीवानगी तेरी संभाल का
शुक्रिया
बिछड़े गए कुछ अक्ल वाले खुद से आ
मिले हैं
यूँ ही नहीं आया दर्द सहने का अंदाज़ आलम
कई गरेबां चाक किये तो अपने ज़ख्म
सिले हैं
चाक-फाड़े (अर्थ पागल होने से है )
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