सोमवार, 23 जुलाई 2012

फटे हाल बच्चे





चोराहे की बत्तियों पर

मेले कपडे के टुकड़े से

चमकीली कारों के शीशे

साफ़ करने की झूंठी कवायद में

हरे, लाल रंगों के बदलाव के साथ

ज़ेबराक्रास पर नाचते रहते हैं.

गाळीयों और दुत्कारो के सिवा

भूले बिसरे

फेंकी गयी चिल्लर  बीनते

नाज़ुक हाथों के लिए

एक सो रुपये का नोट उठाना

सबसे बड़ा सपना होगा शायद.

ये और बात है

रोटी के सूखे टुकड़े की एवज

दिन भर समेटी गयी ज़िल्लत

नन्ही मुट्ठियों से छीनकर 

शराब की दुकान के गल्ले में

जमा करा आते हैं

भीख के ठेकेदार. 

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