जिंदगी तेरे सफर में
लाल कालीनों पर चल कर
चाँद तारे पकड़ने को आतुर हैं लोग.
भ्रस्टाचार की खाद बिखेरती
हीरे पन्ने जड़ी अंगुठियां
स्वर्ण वर्क्षों की फसलें खड़ी कर रही
हैं.
सोने चांदी रत्नों के खजाने
तिजोरियों के अन्धकार को सुपर्द करने
वालो
ये सरमाया नंगी भूखी जनता के
लिए
रोटी कपड़ा और मकान का साधन बन सकता
था
वक्त की सियाह कब्रों में दफीना बना
जा रहा है
आखिर किस काम का है.
नींद की गोलियों के खाली रेपर हैं
गवाह
“मीडासों” के सकून का हिसाब
रेशमी चादरों पर करवटों में लिखा
है.
जिंदगी तेरे सफर में
पसीने की नदी के गोते खा कर
कोडियों की तलाश में हैं लोग
जो भी अक्सर उनकी पकड़ से दूर हैं.
दिन भर कमर तोड मजदूरी से
पीठ से चिपका हुआ भूखा पेट
दुखने लगता है.
कुदाल फावड़े अपना उधार चुक लेते है
मेहनतकश हाथों के छाले
बुझे चूल्हों पर पक कर सो जाते हैं.
जिंदगी तेरे सफर में
चमक दमक की खुद्फरेबी से
लाख बहला करे कोई
दोलत की चकाचोंध से चुंधियाई आंखों को
नींद मयस्सर नहीं है.
नाग बन कर खजानो पर बेठे निर्मम लोगो
तुम्हे भूत बनने तक जागते रहना होगा.
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