अभी बहुत अधिक समय नहीं हुआ एक सरकारी कारिंदे ने
ईमानदार होने की सज़ा अपनी जान से हाथ धो कर पायी
थी
फिर भी कीचड में कमलों ने खिलना नहीं छोड़ा.
यह सही है प्यादों ने फरजी बन कर
ईमान के सूरज को गिरवी रख लिया है
बंदरबाट खा रही है किरण किरण उजाला.
हताश करते इस निराशामय अन्धकार में
तबादलों/गालियों/गोलियों की सज़ा से
बेपरवाह
अपना घर जला कर रौशनी
का इंतज़ाम करने वाले
बाकी हैं अभी
ताकि चोपट राज में खून से लिखी तहरीरें गवाही दें
कि भ्रस्ट कालखंड में भी कुछ लोग ईमान की सनद रहे.
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