१
मैं सुनहरे कल के लिए जान कुर्बान कर
दूगा मगर
मसीहा बनने वाले तू अपने साथ सलीब
लाया क्या ?
तमाम इन्कलाब आखिर महलों के हिमायती
निकले
कोई बताओ फुटपाथ ने ठोकरों के सिवा
पाया क्या ?
२
सतयुग तक में यीशु को पाकदामन एक
वेश्या ही मिली
आज हर कोई ईमान की दुहाई दे रहा है, बड़ा मजाक
है
हम्माम के सब नंगे जेसे काजल की
कोटरी से निकले हैं
फिर भी दाढ़ी में तिनका दिखाई दे रहा
है, बड़ा मजाक है
३
जिसके पास गुजरबसर से ज्यादा है वो
तुम्हारा है
भीख के लिए फेले हुए हाथो छीनने कब
निकलोगे
सोने भरी कमजर्फ तिजोरियां यूँ नहीं खुलने वाली
टूटेंगे खजानो के ताले भी साथ जब सब
निकलोगे
४
भीड़ को इक्कठा करने के लिए कोई शोर
है ज़रूरी
ईमान का ढोल लेकर निकलने वाले खूब
जानते हैं
पतंगे होती ही कटने, काटने, लूटने,
फाड़ने के लिए
खेंच-ढील के दाव में माहिर हवा के
रुख पहचानते हैं