मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

काश!जीवन बच्चा बना रहता


काश!जीवन बच्चा बना रहता
दिलों की स्लेटों पर
संवेदनाओं के चाक से खिचीं           
आडी तिरछी मासूम रेखाएं
अ, ए और अलीफ़ की
दुनियादारी से आज़ाद
परियों, चिड़ियों, गुड़ियों, तारों के
सपने बुना करतीं
बुनती रहतीं.
काली, सफेद, भूरी धरती पर  
देशों, सरहदों, रंग-नस्ल
की जंजीरों,  
धर्म, जात-पात, उंच–नीच
की झंझटो,
गरीबी, अमीरी, भूख, प्यास
की आफतों,   
युद्ध, खूँरेजी, आतंकी मोर्चो से मुक्त    
नीले आकाश की पवित्रता निहारता
काश!जीवन बच्चा बना रहता.